भारतीय अंग्रेजों से देश को आजादी चाहिए


संपादकीय अगस्त 2012

प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी 15 अगस्त का दिन राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जायेगा। ऐतिहासिक लाल किले से प्रधानमंत्राी झंडा फहराकर राष्ट्र के नाम संदेश भी जारी करेंगे। हमें यह करना है, वह करना है, यह नहीं करना है, वह नहीं करना है, इन सभी बातों का ऐलान होगा। अंग्रेजों को भारत से 1947 में जाना पड़ा और भारत से दो देशों का अभ्युदय हुआ। 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान को आजादी मिली और 15 अगस्त 1947 को भारत को। अंग्रेज तो 1947 में ही भारत छोड़कर चले गये, मगर आज भी एक महत्वपूर्ण सवाल आम भारतीयों के दिलो-दिमाग में कौंधता है कि आखिर उन अंग्रेजों के जाने के बाद भारतीय समाज में जो नये अंग्रेज पैदा हुए, उनसे निजात कैसे मिलेगी? इन्हीं भारतीय अंग्रेजों के कारण देश में तमाम तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं। जातिवाद, क्षेत्रावाद, संप्रदायवाद, भाषावाद एवं अन्य तमाम तरह के वाद जिस प्रकार अंग्रेजों ने फैलाये थे, उसी प्रकार का काम इस समय भारतीय अंग्रेज भी कर रहे हैं। भारतीय अंग्रेज आज सभी क्षेत्रों में सक्रिय हैं, चाहे वह राजनीति का क्षेत्रा हो, उद्योग का क्षेत्रा हो या कोई अन्य क्षेत्रा।

भारतीय अंगे्रज कहने का आशय यह है कि जो लोग अपना रोलमाॅडल यूरोपीय देशों एवं अन्य देशों को मानते हैं, रहते तो वे भारत में हैं मगर अपना अधिकांश समय विदेशों में ही बिताते हैं। सब कुछ उन्हें मिलता है भारत से, मगर वे सोचते हैं विदेशी हितों के बारे में। पैसा कमाते हैं भारत से, जमा करते हैं विदेशों में। अपने बच्चों को पढ़ाते हैं विदेशों में, छुट्टियां मनाने जाते हैं विदेशों में। बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, जो लोग भारत में आम जनता के लिए स्वास्थ्य नीतियां बनाते हैं, वही लोग अपना इलाज करवाने विदेशों में जाते हैं। कहने का आशय यही है कि आज देश में ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक है, जिन्हें सब कुछ हासिल हो रहा है भारत से, मगर उनकी सोच परिवेश, सभ्यता एवं संस्कृति भारतीयता से बहुत दूर है। ऐसे लोग अपने देश का सिस्टम चलाने में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

अब ऐसे में सवाल उठता है कि जिन लोगों ने अपने देश को ठीक से जाना एवं समझा नहीं, जिन्होंने गांव नहीं देखा, ग्रामीण लोगों की जीवन शैली को नहीं देखा, वे इस देश का विकास कैसे कर सकते हैं? ऐसे ही लोगों ने आम जनता का जीवन नरक बना रहा है। आर्थिक उदारीकरण के नाम पर समस्त संसाधनों पर मात्रा कुछ प्रतिशत लोगों ने कब्जा जमा रखा है। वैश्वीकरण के नाम पर भ्रष्टाचार को बेतहाशा बढ़ावा मिला, नेताओं, अधिकारियों एवं उद्योग जगत के  नापाक गठजोड़ के कारण भारत नरक बन गया। जिस पैसे का वितरण अपने देश में होना चाहिए था, वह विदेशी बैंकों में जमा है।

आज इन्हीं भारतीय अंग्रेजों के कारण देश में आशिक्षा, भुखमरी, बेरोजगारी, कुपोषण एवं अन्य समस्याओं से निजात नहीं मिल सकी है। अतः आज आवश्यकता इस बात की है कि ऐसे भारतीय अंग्रेजों से देश को बचाया जाय। आज देश में जिस प्रकार आंदोलनों की भरमार है, जातिवाद, क्षेत्रावाद, नक्सलवाद एवं आतंकवाद बढ़ा है, यह सब इन्हीं भारतीय अंग्रेजों की नालायकी के चलते बढ़ा है। इसलिए अब आवश्यकता इस बात की है कि इन भारतीय अंग्रेजों से जितनी जल्दी आजादी मिल जाये, देश एवं समाज के लिए उतना ही अच्छा होगा, अन्यथा समस्याएं और बढ़ती ही जायेंगी। यदि हम ऐसा कर पाने में जरा भी कामयाब हुए तो निश्चित रूप से देश एवं समाज के हित में होगा।