अंगूर शरीर के लिए कितना आवश्यक…


प्राचीन काल से ही अंगूर को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था क्योंकि अधिकतर यह शराब और किशमिश बनाने के काम में ही आता था। यहां तक कि अंगूर को तो शराब की बेटी की संज्ञा दी जाती थी जो आज तक भी प्रचलित है परंतु समय के साथ-साथ इसके गुणों का पूर्णतया अध्ययन कर इसकी अनेकों प्रकार की किस्मों का अध्ययन करने के पश्चात अंगूर को शरीर के लिए एक आवश्यक फल की मान्यता मिली।

एक बलवर्धक और सौंदर्यवर्ध फल है –
अंगूर को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। अंगूर एक ऐसा फल है जिसे खाना लगभग हर कोई पसंद करता है। आपको बता दें कि अंगूर सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। अंगूर विभिन्न रंग के बाजार में आपको मिल जाएंगे, जैसे बैंगनी, लाल, काले, गहरे नीले, पीले, हरे, नारंगी और गुलाबी। अंगूर में पाए जाने वाले पोषक तत्व शरीर के लिए बेहद गुणकारी माने जाते हैं। अंगूर में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी के साथ-साथ पोटैशियम और कैल्शियम भी भरपूर मात्रा मे पाया जाता है। अंगूर में फ्लेवोनॉयड्स और शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मददगार माने जाते हैं। इतना ही नहीं अंगूर में पर्याप्त मात्रा में कैलोरी, फाइबर, ग्लूकोज, मैग्नीशियम और साइट्रिक एसिड जैसे कई पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। अंगूर के सेवन से इम्यूनिटी को मजबूत बनाया जा सकता है तो वहीं इसके सेवन से वजन को भी बढ़ाया जा सकता है।

अंगूर के आयुर्वेदिक एवं
वैज्ञानिक गुण –
अंगूर के नन्हें-नन्हें दानों में पॉली फेनोलिक फाइटो केमिकल कंपाउंड पाए जाते हैं। ये एंटी ऑक्सीडेंट्स शरीर को न केवल कैंसर से बल्कि कोरोनरी हार्ट डिजीज, नर्व डिजीज, अल्जाइमर, वाइरल तथा फंगल इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं।
अंगूर में सीमित मात्रा में कैलोरी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, सोडियम, फाइबर, विटामिन ए, सी, ई, के, कैल्शियम, कॉपर, मैग्नीशियम, मैंग्नीज, जिंक और आयरन भी मिलता है।
शरीर के किसी भी भाग से रक्त स्राव होने पर अंगूर के एक गिलास जूस में दो चम्मच शहद घोलकर पिलाने पर रक्त की कमी को पूरा किया जा
सकता है।
अंगूर का पल्प ग्लूकोज व शर्करा युक्त होता है। विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में होने से अंगूर का सेवन भूख बढाता है, पाचन शक्ति ठीक रखता है, आंखों, बालों एवं त्वचा को चमकदार
बनाता है।
हार्ट अटैक से बचने के लिए काले अंगूर का रस एस्प्रिन की गोली के समान कारगर है। एस्प्रिन खून के थक्के नहीं बनने देती है। काले अंगूर के रस में फ्लेवोनाइडस नामक तत्व होता है और यह भी यही कार्य करता है।
अंगूर के गुणों और उपयोगिता को देखते हुए आजकल भारत में अंगूर की खेती का प्रचलन बहुत चल रहा है। किसानों को अंगूर की खेती से अधिक पैदावार लेने के लिए अच्छी प्रजातियों के बारे में जानना बहुत जरूरी है। अंगूर की खेती के लिए कुछ किस्मों के बारें में बताने जा रहे हैं जो देश के प्रसिद्ध कृषि विश्वविद्यालयों से तैयार किये गये हैं।
अरका नील मणि– यह वैरायटी ब्लैक चंपा और थॉम्पसन बीज रहित किस्मों को क्रॉस कराकर तैयार किया है। इसकी औसतन उपज लगभग 28 टन/हेक्टेयर है। इसको शराब बनाने के काम में लिए
जाता है।
अनब-ए-शाही- अंगूर की इस वैरायटी की खेती आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और कर्नाटक जैसे आदि राज्यों में की जाती है। यह वैरायटी अलग अलग जलवायु के अनकूल है। अंगूर की यह किस्म पूर्णरूप से विकसित हो जाती है तो इसकी बेरियां लम्बी, मध्यम लंबी, बीज वाली और एम्बर रंग दिखाई देती है। इसका जूस मीठा होता है। इस वैरायटी से औसतन पैदावार 35 टन तक ली जा सकती है
बंगलौर ब्लू- अंगूर की यह वैरायटी कर्नाटक में सबसे अधिक उगाई जाती है। इसकी बेरियां पतली त्वचा वाली छोटे आकार की, गहरे बैंगनी, अंडाकार और बीजदार वाली होती है। इस वैरायटी के अंगूर का रस बैंगनी रंग वाला, साफ-सुगंधित 16-18 प्रतिशत टीएसएस वाला होता है।
भोकरी – अंगूर के इस किस्म की खेती तमिलनाडु में की जाती है। इस वैरायटी की बेरियां पीली हरे रंग की, मध्यम लंबी, बीजदार और मध्यम पतली त्वचा वाली होती हैं। इसका जूस साफ और 16-18 प्रतिशत टीएसएस वाला होता है। यह इस किस्म की औसतन पैदावार 35 टन/ हेक्टेयर/ वर्ष है।
गुलाबी – वैरायटी की खेती तमिलनाडु में सबसे अधिक की जाती है। इस किस्म की बेरियां छोटे आकार वाली, गहरे बैंगनी, गोलाकार और बीजदार होती है जिसका टीएसएस 18-20 प्रतिशत के मध्य होता है। इस वैरायटी से औसतन उपज करीब 10-12 टन हेक्टेयर है।
काली शाहबी – इन किस्मों को महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में उगाया जाता है। इस किस्म की बेरियां लम्बी, अंडाकार बेलनाकार, लाल- बैंगनी और बीजदार होती हैं। इस वैरायटी की औसतन उपज करीब 10-12 टन/ हेक्टेयर तक हो
जाती है।
परलेटी – इस किस्म की खेती पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में उगाई जाती है। इस वैरायटी की बेरियां बीजरहित, छोटे आकार वाली, थोड़ा एलपोसोडियल गोलाकार और पीले हरे रंग की होती है। इस वैरायटी की औसतन उपज 35 टन/हेक्टेयर तक हो जाती है। इसके जूस में 16-18 प्रतिशत के बीच टीएसएस होता है।
थॉम्पसन सीडलेस – इस किस्म की खेती महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक आदि राज्यों में की जाती है। इस किस्म की बेरियां लंबी, मध्यम त्वचा वाली पीली होती है। यह वैरायटी व्यापक रूप से बीजरहित है। इसके जूस में 20-22 प्रतिशत के मध्य टीएसएस होता है। इसका रस मीठा और भूरे रंग का होता है। इस वैरायटी की औसतन पैदावार 20-25/टन हेक्टेयर है। इस वैरायटी का इस्तेमाल किशमिश बनाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा भारत में अंगूर की कुछ अन्य वैरायटी भी हैं जिसमें शरद सीडलेस, परलेट, रास -ए-गणेश, सोनाका, ब्यूटी सीडलेस, पूसा सीडलेस, पूसा नवरंग, अरका राजसी, अरका कृष्णा, अरका श्याम आदि।
एक समय तो ऐसा भी था जब भारत में अंगूर की खपत बढ़ती चली गयी और अन्य देशों में इसे आयात किया जाता रहा है मगर अब भारत में भिन्न-भिन्न प्रजातियों की अंगूर की उपज को देखते हुए न केवल अंगूरों का आयात कम हुआ है, अपितु अन्य देशों में भी यह जाने लगा है और देश की अर्थव्यवस्था में एक प्रभावी योगदान दे
रहा है। थ्

  • सम्पदा जैन
    अंगूर को अधिक मात्रा या गलत तरीके से खाने पर नुकसान भी हो सकते हैं
    अंगूर में कैलोरीज कम होती है लेकिन अधिक मात्रा में सेवन से वजन बढ़ सकता है।
    अंगूर को अधिक मात्रा में खाने से अपच की शिकायत हो सकती है।
    अंगूर को ज्यादा मात्रा में सेवान करने से गैस की परेशानी हो सकती है।
    अंगूर में अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता है जिससे इसका अधिक सेवन उबकाई और उलटी का कारण बन सकता है।
    छोटे बच्चों को अंगूर देने से बचना चाहिए, क्योंकि अंगूर छोटा है और यह बच्चे के गले में अटक सकता है।
    अंगूर का सेवन करने के घरेलू नुस्खे
    इम्यूनिटी होती है बूस्ट– अंगूर विटामिन सी से भरपूर होता है, इसलिए इसका सेवन करने से इम्यूनिटी बूस्ट होती है जिससे वायरस और बैक्टीरिया से सुरक्षित रह सकते हैं।
    खून की कमी होती है दूर– अंगूर में आयरन पाया जाता है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है जिससे खून की कमी दूर होती है इसलिये अंगूर का जूस पीना फायदेमंद होता है।
    हड्डियों के लिए फायदेमंद – अंगूर में मैग्नीज और आयरन जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो हड्डियों के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होते हैं। इसका नियमित सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती हैं और हड्डियों के निर्माण में भी मदद मिलती है।
    हार्ट के लिए फायदेमंद – अंगूर का सेवन हार्ट के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि अंगूर का जूस एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होता है जिससे हार्ट हेल्दी रहता है और हार्ट से जुड़ी बीमारियों का जोखिम कम होता है।
    त्वचा के लिए फायदेमंद – अंगूर विटामिन सी, विटामिन ए और विटामिन ई जैसे तत्वों से भरपूर होता है, जो त्वचा के लिए फायदेमंद होता है। अंगूर खाने से झुर्रियों की समस्या दूर होती है और त्वचा पर निखार भी आता है।
    शरीर को मिलती है ऊर्जा – कमजोरी और थकान महसूस होने पर अंगूर के जूस पीने से उसमें मौजूद तत्व शरीर को दिनभर एनर्जेटिक रखने में मदद करते हैं।
    आंखों के लिए फायदेमंद – अंगूर का जूस विटामिन ए से भरपूर होता है, इसके जूस का सेवन करने से आंखें स्वस्थ रहती हैं और आंखों की रोशनी में भी सुधार होता है।
    अंगूर फोड़े-फुंसियों एवं मुंहासों को सुखाने में सहायता करता है। अंगूर के रस के गरारे करने से मुंह के घावों एवं छालों में राहत मिलती है।
    एनीमिया के लिए अंगूर से बढ़कर कोई दवा नहीं है। उल्टी आने व जी मिचलाने पर अंगूर पर थोड़ा नमक व काली मिर्च डालकर सेवन करें।
    पेट की गर्मी शांत करने के लिए 20-25 अंगूर रात को पानी में भिगो दें तथा सुबह मसल कर निचोड़ लें। अब इस रस में थोड़ी शक्कर मिलाकर इसका
    सेवन करें।
    भोजन के आधा घंटे बाद अंगूर का रस पीने से खून बढ़ता है और कुछ ही दिनों में पेट फूलना, बदहजमी आदि बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
    अंगूर के रस का सेवन करना माइग्रेन से निजात दिला सकता है। इतना ही नहीं इसे चेहरे पर लगाने से झुर्रियां कम होती हैं और त्वचा में कसाव के साथ ही ग्लो भी आता है।